कॉलेज के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट लेती तो आंखों के बगैर जानती थी, कितनी आंखें मुझे देख रही होंगी. कोई मदद करता तो कोई सवाल. देख नहीं सकती तो इतनी दूर कॉलेज जाने की क्या जरूरत! नेत्रहीन होना कभी भी मेरे लिए समझौते की वजह नहीं बन सका. बगैर आंखों के मैंने ख्वाब देखे और उन्हें पूरा किया.from Latest News ट्रेंड्स News18 हिंदी https://ift.tt/2HvxfEZ
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