चौथी तिमाही में GDP बढ़कर 7.7% हो गई है, लेकिन उपचुनावों के नतीजों से उत्साहित विपक्ष GDP का मतलब गैस, डीजल और पेट्रोल बता रहा है. विपक्ष का ये तंज यूं ही नहीं है. आज ही रसोई गैस के दाम बढ़ गए. मोदी राज में रसोई गैस जितनी महंगी हुई उतनी पहले कभी नहीं थी. मनमोहन सरकार के जमाने की कीमत को मोदी राज में पेट्रोल-डीजल ने बहुत पहले पीछे छोड़ दिया. यानी आज महंगाई का राज है. देश के बड़े हिस्से के किसान सड़कों पर हैं. हालांकि इस सरकार ने विदेशों में भारत की धाक जमाई. स्मार्ट सिटी, सड़क, बिजली और सफाई के पैमाने पर सरकार खुद को आज़ाद भारत की अनूठी सरकार बताती रही. लेकिन इतना होने के बावजूद 282 सांसदों वाली पार्टी चार साल में 271 पर पहुंच गई. अगले साल आम चुनाव है. लेकिन राहत की उम्मीद पाली जनता शायद राहत में नहीं. किसानों की ख़ुदकुशी जारी है. विजय माल्या, नीरव मोदी जैसे भगौड़े पकड़ से बाहर हैं. कालेधन पर विदेशी बैंकों से रकम लौटना तो दूर, कालेधन वालों की लिस्ट तक सार्वजनिक नहीं हो पा रही. GST के बाद सरकार का ख़जाना तो भर रहा है, लेकिन जनता फटेहाल है. तीन साल से सरकार ने बेरोजगारों का आंकड़ा जारी नहीं किया है. चार साल में प्रधानमंत्री मोदी ने एक दिन की भी छुट्टी नहीं ली. लेकिन जनता की कसौटी पर सरकार पूरी तरह खरी उतरी हो, उपचुनावों के नतीजे ऐसा नहीं कहते. बिजली, सड़क से लेकर कई मोर्चों पर कामयाबी के दावे करने वाली सरकार को उपचुनावों में मिलने वाली हार ख़तरे की घंटी बजा रही है. अगर ऐसा है तो कई अहम सवाल खड़े होते हैं. देखिए ये वीडियो.from Latest News शो News18 हिंदी https://ift.tt/2kGUVxd
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