21वीं सदी में जहां प्रदेश के सभी कार्यालय एयर कंडीशनर और नई टेक्नॉलजी से युक्त हैं, लेकिन प्रदेश का ऊर्जा महकमा जिसके जिम्मे प्रदेश को हर समय ऊर्जावान बनाना हैं वही महकमा पुराने ढर्रे पर चले तो सवाल उठना लाजमी है कि आखिर कैसे प्रदेश आगे बढ़ेगा. एक ओर सरकार कोयले के दोहन को रोकने की योजनाएं चला रही है, लेकिन उत्तराखंड पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड अपने कर्मचारियों, अधिकारियों को कोयला जलाने के लिए प्रेरित कर रहा है. कर्मचारियों व अधिकारियों को हर दिन के हिसाब से दो से चार किलो कोयले का भुगतान विभाग द्वारा किया जा रहा है, इसके लिए कर्मचारियों को मिलने वाले भत्ते का खाका भी तैयार किया गया है. विभाग कर्मचारियों को 4500 रूपए व अधिकारियों को 7 हजार रूपये भत्ता देगा. इससे महकमे को 2 से तीन करोड़ का वार्षिक वित्तिय भार उठाना पड़ेगा. मामले को लेकर विभाग के प्रबंध निदेशक बीसीके मिश्रा का कहना है कि यह परंपरा लंबे समय से चली आ रही है, लेकिन इस साल युपीसीएल कर्मचारियों को मिलने वाला कोयला भत्ता भी बंद कर देगा.from Latest News उत्तराखंड News18 हिंदी https://ift.tt/2ttR9vo
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