नमाज़ के बाद सड़कों से गुज़रते हुए ठिठक जाता हूं. दुकानों में इफ़्तार के लिए कितनी तरह की चीज़ें सजी होती हैं. मुझे याद नहीं कि मैंने उनमें से कोई चीज़ कभी अपने दस्तरख़्वान पर सजी देखी हो. सहरी पर हम नमक के साथ रात का चावल खाते हैं और इफ्तार पर चावल के लाल मिर्च. जब जीभ जवाब देने लगती है तो निवाला भीतर ठेलने के लिए पानी पी लेता हूं.from Latest News रिश्ते News18 हिंदी https://ift.tt/2x3R1Ys
No comments:
Post a Comment