अमेरिकी लेखिका और राजनीति कार्यकर्ता हेलन कैलर को कौन नहीं जानता. श्रवण बधिर और दृश्टिहीन होने के बावजूद उन्होने द स्टोरी ऑफ माय लाइफ जैसी फेमस किताब लिखी. ठीक इसी तरह है बीजापुर के धर्मेंद्र की कहानी. दृश्टिहीन होने के बावजूद बिना किसी सरकारी सहायता के अपना रोजगार स्थापित करने में धर्मेंद्र सफल रहे. बीजापुर-भोपालपट्नम नेशनल हाइवे पर बसे छोटा से गांव रूद्रारम के धर्मेंद्र के हौसले की कहानी सुनकर शायद आपको भरोसा न हो लेकिन वास्तविकता से रूबरू होने पर आप जरूर कहेंगे की असम्भव कुछ भी नहीं. गंभीर बीमारी की चपेट में आकर धर्मेंद की दोनों आंखों की रोशनी चली गई. लेकिन दृश्टिहीन होने के बाद भी धर्मेंद ने अपने हौसले को पस्त होने नहीं दिया. तमाम संघर्षों से जूझते हुए धर्मेंद्र ने अपनी पहचान एक सफल उद्यमी के रूप स्थापित की. धर्मेंद एक हॉलर मिल के संचालक है जिसे वे खुद ही चलाते है.from Latest News छत्तीसगढ़ News18 हिंदी https://ift.tt/2rI4nnm
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